जिंदगी में कुछ करना है तो इस लड़के की कहानी को जरूर पढ़िए


सुहास गोपीनाथ, आंत्रप्रेन्योर, जन्म: 4 नवंबर 1986, शिक्षा: फिलहाल इंजीनियरिंग की पढ़ाई जारी है।
पिता: एम. आर. गोपीनाथ (रक्षावैज्ञानिक)
मां- कला गोपीनाथ(गृहिणी), 
भाई- श्रेयस, 

क्यों चर्चा में
हाल ही में उनकी कंपनी ग्लोबल्स इंक. ने अलीबाबा के जैक मा के साथ स्टार्ट अप के लिए हाथ मिलाए हैं। कंपनी अमेरिका में रजिस्टर इसलिए कराई, क्योंकि भारत में कंपनी रजिस्टर करना हो तो उम्र 18 साल होना जरूरी है। अमेरिका में 15 मिनट में काम हो गया।

बात तीन साल पहले की है। बैंगलुरू के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस में देश के तमाम सीईओ को बुलाया गया था। एक कार रुकी। उसमें से एक लड़का उतरा। गेट पर सिक्युरिटी वालों ने रोक लिया। कहा- तुम बच्चे हो, बड़े लोगों के कार्यक्रम में कहां जा रहे हो- उस बच्चे ने मोबाइल निकाला और आयोजकों को फोन लगा दिया। आयोजक भागते हुए मेन गेट पर आए और इस बच्चे को आदरपूर्वक भीतर ले गए। यह बच्चा और कोई नहीं 17 साल का सुहास गोपीनाथ था। बैंगलुरू की आईटी सॉल्यूशंस कंपनी ग्लोबल्स इंक. के सीईओ और प्रेसीडेंट। सुहास को इस कार्यक्रम में बतौर स्पीकर बुलाया गया था।

दुकान पर बैठकर बनाई वेबसाइट
दुनिया के सबसे कम उम्र के इस सीईओ की कहानी मध्यमवर्ग के आम बच्चों जैसी है। सुहास बैंगलुरू के एयरफोर्स स्कूल में पढ़ते थे। बचपन में रुचि पशु विज्ञान पढ़ने में थी। लेकिन दोस्तों को कंप्यूटर पर बात करते देख लगा कि उनकी भी कंप्यूटर पर रुचि जागी। उस वक्त घर पर न तो कंप्यूटर था न ही लेने की स्थिति थी। घर के पास ही एक इंटरनेट कैफे जाने लगे। महीने में पॉकेट मनी 15 रु. वह कम पड़ने लगे। दुकान 1 से 4 बंद रहती थी। तब सुहास ने दुकान वाले से कहा- मैं आपकी दुकान 1 से 4 खोल दूंगा और आप मुझे फ्री नेट सर्फ करने दे। दुकानदार मान गया और वहीं पर इस आंत्रप्रेन्योर ने पहली वेबसाइट बना डाली। फ्रीलांस मार्केट प्लेस पर वेबसाइट बिल्डर के रूप में रजिस्टर हो गए और बिना किसी पैसे के न्यूयॉर्क की एक कंपनी की वेबसाइट बनाई।

13 की उम्र में कमाए 100 डॉलर 
तब उम्र 13 थी और कमाए 100 डॉलर। पैसे जमा करने के लिए बैंक अकाउंट था नहीं। पिता को बताया तो वे नाराज हुए। विरोध किया, पर भाई ने प्रोत्साहित किया। भाई इंजीनियरिंग कर रहा था, जबकि सुहास 9वीं में था। भाई के लिए पिताजी कंप्यूटर ले आए, कुछ समय बाद सुहास ने अपने पैसे से कंप्यूटर लिया। 14 साल की उम्र में उनको अमेरिका की कंपनी नेटवर्क साल्यूशंस से पार्ट- टाइम जॉब की पेशकश की गई। वह सुहास की शिक्षा-दीक्षा को भी स्पॉन्सर करना चाहती थी। उसी दौरान बिल गेट्स के बारे में पढ़ा तो सुहास को लगा कि कंपनी शुरू करने में ज्यादा मजा है। इसी वक्त उन्होंने अपनी कंपनी ग्लोबल्स इंक बनाई। इसे अमेरिका में इसलिए रजिस्टर कराई, क्योंकि भारत में 18 वर्ष से कम के लोग कंपनी नहीं बना सकते। अमेरिका में कंपनी बनाने में 15 मिनट लगे। सुहास का एक दोस्त जो अमेरिकी यूनिवर्सिटी में पढ़ रहा था, वह कंपनी का बोर्ड मेम्बर बन गया। परंतु दसवीं प्री बोर्ड में सुहास गणित में फेल हो गया।

विश्व बैंक ने दिया आमंत्रण 
स्कूल में मां को बुलाया और मां ने स्पष्ट कहा सिर्फ पढ़ाई और पढ़ाई और कुछ भी नहीं। चार महीने पढ़ने पर प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए। 17 साल की उम्र तक कंपनी के बारे में घर में किसी को बताया नहीं था। बारहवीं पूरी कर बैंगलुरू के एक इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला ले लिया। पांचवें सेमेस्टर में विश्वबैंक ने बोर्ड मीटिंग में शामिल होने का आमंत्रण दे दिया।

buttons=(Accept !) days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Accept !
To Top