IPL 8 : मुंबई इंडियंस की किन गलतियों की वजह से हुई हार

आईपीएल-8 में मुंबई इंडियन्स एक और मैच हार गई। इस बार उसे दिल्ली डेयरडेविल्स ने 37 रनों से हराया। मुंबई की यह पांचवीं हार है और इस हार के साथ ही वह अंक तालिका में सबसे नीचे है। वैसे, देखा जाए तो यह मैच पूरी तरह से एकतरफा ही रहा। मैच में कुछ ऐसी गलतियां हुईं, जिसने मुंबई को मैच में कभी बने ही नहीं रहने दिया। दिल्ली के मुकाबले मुंबई की टीम ज्यादा मजबूत है, बावजूद इसके उसने दोयम दर्जे की टीम जैसा परफॉर्मेंस किया। दिल्ली डेयरडेविल्स ने पहले बैटिंग करते हुए श्रेयस अय्यर (56 गेंद, 83 रन) और कप्तान जेपी डुमिनी (50 बॉल, 78 रन) की धमाकेदार पारियों की बदौलत निर्धारित 20 ओवर्स में 4 विकेट के नुकसान पर 190 रन बनाए। जवाब में मुंबई इंडियन्स 9 विकेट के नुकसान पर 153 रन ही बना सकी। मुंबई की तरफ से कोई भी बैट्समैन हाफ सेन्चुरी भी नहीं लगा सका।

 मुंबई इंडियन्स की ऐसी पांच गलतियों के बारे में बता रहा है, जिसके कारण उसे बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा।

पहली गलती : रोहित शर्मा में कॉन्फिडेंस की कमी
मैच जीतने के लिए टीम से कहीं अधिक कप्तान को कॉन्फिडेंट होने की जरूरत होती है। कप्तान कॉन्फिडेंट होता है तो टीम में कॉन्फिडेंस आता है, पर रोहित शर्मा टॉस के वक्त ही असमंजस में थे। टॉस जीतने के बाद उन्होंने कहा कि वे पिच के बारे में कुछ कह नहीं सकते। उन्हें नहीं पता कि यह पिच पहले बैटिंग करने वाले की मदद करेगी या बाद में बैटिंग करने वाली की। इस लिहाज से उन्होंने पहले बॉलिंग करना ही उचित समझा। मैच से ठीक पहले पिच को नहीं पढ़ पाना एक कप्तान की नाकामी है। इसका साफ मतलब है कि उन्होंने पिच को ठीक तरीके से देखा ही नहीं और उनकी कोई प्लानिंग ही नहीं थी, तभी तो दिल्ली की पिच पर उन्होंने पहले बॉलिंग करना ही उचित समझा।

दूसरी गलती : विकेट लेने की बजाय रन रोकने पर ज्यादा फोकस
मुंबई इंडियन्स की तरफ से दूसरी गलती उनके बॉलर्स ने की। उन्होंने विकेट लेने की बजाय रन रोकना उचित समझा, जो टी 20 में कभी कारगर साबित नहीं हो सकता। 20 ओवर्स के खेल में अगर आपके पास विकेट बचे हैं, तो आप आसानी से बड़ा स्कोर खड़ा कर सकते हैं। दिल्ली ने ऐसा ही किया। मुंबई को पहली सफलता तो दो रन के स्कोर पर ही मिल गया, जब मयंक अग्रवाल एक रन बनाकर आउट हो गए, लेकिन उसके बाद मुंबई को जल्दी विकेट नहीं मिला। वे बैट्समैन को रन नहीं बनाने देने की कोशिश में जुट गए। ऐसा करने में मुंबई इंडियन्स के बॉलर्स 10 ओवर्स तक तो कामयाब रहे, लेकिन उसके बाद उनकी खूब धुनाई हुई। 10 ओवर्स तक दिल्ली का स्कोर सिर्फ 65 रन था। उसने आखिरी 10 ओवर्स में 125 रन जुटाए। यह सिर्फ इसलिए हो पाया, क्योंकि दिल्ली के पास 9 विकेट बचे हुए थे।

तीसरी गलती : रोहित शर्मा का ओपनिंग में नहीं आना
रोहित शर्मा ओपनिंग करने नहीं उतरे। उन्होंने पार्थिव पटेल के साथ लिंडल सिमंस को भेज दिया, जबकि बड़े टारगेट का पीछा करने के लिए अच्छी शुरुआत की जरूरत होती है और रोहित पटेल के साथ मिलकर ऐसा कर सकते थे। खैर, सिमंस को जिस काम के लिए उन्होंने भेजा था, वो तो हो नहीं पाया और सिमंस सिर्फ 15 रन बनाकर आउट हो गए। रोहित शर्मा चौथे नंबर पर बैटिंग करने आए, तब तक टीम पर काफी दबाव बढ़ चुका था। वे भी कुछ खास नहीं कर सके और 30 रन बनाकर आउट हो गए।

चौथी गलती : कोई लंबी पार्टनरशिप नहीं कर पाना
मुंबई इंडियन्स के बैट्समैन की एक और बड़ी गलती रही कि उन्होंने लंबी पार्टनरशिप करने की बजाय तेजी से रन बनाने को महत्व दिया। 191 रन का टारगेट हासिल करने के लिए तेजी से रन बनाने की जरूरत तो होती है, लेकिन लंबी पार्टनरशिप भी उतनी ही जरूरी है। लंबी पार्टनरशिप होने से बैट्समैन की नजरें बॉल्स पर टिक जाती हैं और वह आसानी से शॉट लगाने लगता है। दिल्ली की तरफ से अय्यर और डुमिनी के साथ भी ऐसा ही हुआ। मुंबई की तरफ से कोई भी पार्टनरशिप 50 रनों की भी नहीं हुई। जब तेजी से रन बनाने की जरूरत थी, तब इमरान ताहिर के एक ओवर में तीन बैट्समैन आउट हो गए।

पांचवीं गलती : हरभजन से पहले हार्दिक पांड्या को भेजना
रोहित शर्मा ने ओपनिंग में नहीं उतरकर गलती तो की ही थी, उन्होंने हरभजन की बजाय पहले हार्दिक पांड्या को खेलने के लिए भेज दिया। हरभजन पांड्या से अधिक सक्षम बैट्समैन हैं और उनमें लंबे शॉट्स लगाने की क्षमता भी है। हरभजन अगर पांड्या से पहले आते तो दबाव कुछ कम कर सकते थे। पांड्या के आने के कारण बल्लेबाजी क्रम ही बिगड़ गया और इसका नतीजा यह हुआ कि न तो पांड्या चल पाए और ना ही हरभजन। पांड्या बिना खाता खोले आउट हो गए, जबकि हरभजन 9 रन बनाकर आउट हो गए।


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