पढ़िए हॉस्टल में लड़कियों की कहानी, उन्हीं की जुबानी

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अलापुझा (केरल). भारतीय खेल प्राधिकरण (एसएआई) के केरल स्थित हॉस्टल में चार ट्रेनी महिला एथलीट्स की खुदकुशी के मामले में हॉस्टल की कुछ छात्रों और यहां ट्रेनर रह चुकी एक स्विमर ने आपबीती सुनाई है। 

ओलिंपिक स्विमर रह चुकीं निशा मिलेट ने बताया कि हॉस्टल के बारे में कुछ भी अच्छा कहने के लिए नहीं है। बता दें कि अलापुझा सेंटर में वॉटर स्पोर्ट्स की ट्रेनिंग ले रहीं एथलीट्स के मानसिक-शारीरिक उत्पीड़न का आरोप उनके सीनियर्स और वार्डन पर लगा है। इस मामले में खेल मंत्रालय ने जांच के आदेश दिए हैं। सेंटर के सीनियर्स और वार्डन का कहना है कि चारों लड़कियां कुछ दिन पहले एक शादी में गई थीं और शराब के नशे में हॉस्टल लौटी थीं। इस पर सीनियर्स ने उन्हें ताना मारा था।


सीनियर्स करते हैं रैगिंग
'मैं साईं सेंटर की जूनियर एथलीट हूं। मैं भी सीनियर्स की रैगिंग झेल रही हूं।' यह कहना है बेंगलुरु के साईं हॉस्टल की एक एथलीट का। इस खिलाड़ी ने कहा, "मैं अपना नाम नहीं बता सकती। इससे मेरे लिए बहुत मुश्किलें खड़ी हो जाएंगी। कुछ दिन पहले लगातार तीन दिन के लिए मुझे मेरे कमरे में बंद कर दिया गया था और लंच के टाइम ऐसा करीब एक हफ्ते तक हुआ। मैं लगातार चीखती रही और मदद के लिए पुकारती रही लेकिन किसी ने नहीं सुनी। जूनियर्स इतनी डरी हुई थीं कि वो कुछ कर नहीं सकती थीं।" इसके बाद इस एथलीट ने एक और घटना के बारे में बताया जो किसी और जूनियर खिलाड़ी के साथ हुई थी। इन्होंने बताया, "वो लड़की तैरना नहीं जानती थी। तब तीन सीनियर्स ने मिलकर उसे पूल में जबरदस्ती उतार दिया। ये सब एक मजाक के तौर पर शुरू हुआ था और कुछ समय बाद ही वो लड़की डूबने लगी। आखिर में एक जूनियर लड़की ने उसकी जान बचाई।" इस एथलीट के अनुसार ज्यादातर जूनियर्स इन्हीं चीजों के देखते हुए सीनियर्स के खिलाफ शिकायत करने से डरते हैं। हमने शिकायत की भी थी, लेकिन सीनियर्स को वॉर्निंग देकर छोड़ दिया गया। इसके दो महीने बाद सीनियर्स ने फिर उस लड़की को पूल में धक्का दे दिया था।

अब साथ रहता है कोच
इन घटनाओं के बाद अब एक स्विमिंग कोच हमेशा हमारे साथ रहता है। लड़कियों ने ये भी कह दिया है कि जब तक कोई स्विमिंग कोच उनके साथ नहीं होगा वो ट्रेनिंग नहीं करेंगी। पूर्व ओलिंपिक स्विमर निशा मिलेट, जो साईं हॉस्टल में लड़कियों के ट्रेनिंग देती हैं, ने भी माना कि हॉस्टल में सुरक्षा इंतजामों की कमी है।

अधिकारियों ने रूम में आने को कहा
निशा मिलेट के अनुसार उन्हें भी एक मीटिंग के दौरान कुछ अधिकारियों ने एप्रोच किया था और उनके रूम में आने के लिए कहा था। निशा के अनुसार, "मणिपुर में एक स्पोर्ट्स मीट के दौरान साईं हॉस्टल के वरिष्ठ अधिकारी मेरे पास बैठे, मुझे बधाई दी और फिर मुझसे उनके रूम में आने के लिए कहा। उन्होंने तर्क दिया कि हमारे रूम में बहुत बढ़िया टीवी है। ये सुनकर मैं कुछ असहज हो गई। मैंने विनम्रता से उन्हें मना किया, लेकिन जब वो नहीं माने तो शिकायत करने की धमकी थी। इसके बाद वो चले गए।"

निशा ने बताया कि अधिकारी वर्ग किसी के भी सामने आपको डराते-धमकाते हैं। ऐसे में लड़कियों के लिए हॉस्टल में रुकना काफी कठिन है। हर लड़की के साथ ऐसी घटना कम से कम एक बार तो हुई ही है। मेरी सलाह है कि इस हॉस्टल में कोई भी लड़की ना रुके। इसके बारे में कुछ भी अच्छा कहने के लिए नहीं है। मैं सिर्फ इतना कहना चाहूंगी कि एथलीट्स के लिए ये अच्छा संस्थान नहीं है। सुरक्षा से लेकर सुविधाओं और खाने तक का स्तर नहीं है। यहां तक कि स्विमिंग पूल के चेंजिंग रूम में सांप तक निकल चुका है। पिछले सालों में स्विमिंग पूल की स्थिति नहीं सुधरी है। यहां पानी में मेंढक तक रहते हैं।

साफ करने पड़ते थे टॉयलेट
23 साल की एक और एथलीट शाहजहानी के अनुसार, "मैं आज सीनियर हूं, लेकिन जूनियर रहते हुए मेरे साथ भी ऐसे डरावने अनुभव हुए हैं। हमें सीनियर्स के रूम साफ करने प़डते थे। यहां तक कि टॉयलेट भी। एक बार मुझे प्रैक्टिस के लिए जाना था और बेड पर मैंने अपने कपड़े निकालकर रखे। जब मैं कुछ कपड़े धोने के बाद लौटी तो देखा कि सीनियर्स ने मेरे कपड़े गंदे कर दिए हैं और उन्हें डस्टबिन में फेंक दिया है।"

पीछा करते थे लड़के
एक और खिलाड़ी अंजू बॉबी जॉर्ज ने बताया, "प्रैक्टिस के पहले और बाद में अक्सर पुरुष लड़कियों का पीछा करते हैं। ट्रेनिंग के दौरान भी कई लोग हमारे आसपास घूमते रहते हैं। हम रात 8 बजे तक प्रैक्टिस करते थे और ऐसे में इतनी रात को लौटना मुश्किल होता था। सालों पहले 2004 में इस बारे में शिकायत की थी, पर कुछ नहीं हुआ। हमें कहा गया कि वो भी स्पोर्ट्स स्टूडेंट हैं, लेकिन वो सच नहीं था।"

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Yuva Bhaskar: पढ़िए हॉस्टल में लड़कियों की कहानी, उन्हीं की जुबानी
पढ़िए हॉस्टल में लड़कियों की कहानी, उन्हीं की जुबानी
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