पढ़िए क्यों नहीं काटे जाते बरगद के पेड़ | Jyotish Tips in Hindi,

बरगद का पेड़ अपनी विशेषताओं और लंबे जीवन के कारण इस वृक्ष को अनश्‍वर माना गया है। इसीलिए इस वृक्ष को अक्षयवट भी कहा जाता है।

लोक मान्यता है कि बरगद के एक पेड़ को काटे जाने पर प्रायश्चित के तौर पर एक बकरे की बलि देनी पड़ती है। शास्त्रों में कहा गया है कि बरगद वृक्ष को अमावश्या के दिन पूजने से सौभाग्य एवं स्थायी धन और सुख-शांति की प्राप्ति होती है।

इसी दिन ही सावित्री ने यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण की रक्षा की। सावित्री और सत्यवान की कथा से वट वृक्ष का महत्व लोगों को ज्ञात हुआ क्योंकि इसी वृक्ष ने सत्यवान को अपनी शाखाओं और शिराओं से घेरकर जंगली पशुओं से उनकी रक्षा की थी। इसी दिन से जेष्ठ कृष्ण अमावस्या के दिन वट की पूजा का नियम शुरू हुआ।

शनि देव की कृपा पाने के लिए चाहें तो वट वृक्ष की जड़ों को दूध और जल से सींचें इससे त्रिदेव प्रसन्न होंगे और शनि का प्रकोप कम होगा। तथा धन और मोक्ष की चाहत पूरी होगी।

वट वृक्ष की पूजा इसदिन आमतौर पर केवल महिलाएं करती हैं जबकि पुरूषों को भी इस दिन वट वृक्ष की पूजा करनी चाहिए। इसकी पूजा से वंश की वृद्घि होती है।


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