लुप्त होने वाली है इंसानों की प्रजाति: अमेरिकी शौध

वाशिंगटन। धरती पर जीवन के अंत का नया दौर शुरू हो चुका है और सबसे पहले विलुप्त होने वाली प्रजातियों में मानव प्रजाति भी हो सकती है। अमरीका के तीन विश्वविद्यालयों के अध्ययन में यह चौंकाने वाली बात सामने आई है।

स्टेनफर्ड, प्रिंसटन और बर्कले विश्वविद्यालय के अध्ययन में कहा गया है कि रीढ़ की हड्डी वाले जानवरों के लुप्त होने की दर सामान्य से 114 गुना तेज है। शोधकर्ताओं का कहना है कि हम अब लुप्त होने के छठे बड़े दौर में प्रवेश कर रहे हैं। इंसानों के भी शुरुआती दौर में ही विलुप्त होने की आशंका है।

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 1900 से अब तक रीढ़ की हड्डी वाले जानवरों की 400 प्रजातियां लुप्त हो चुकी हैं। बड़े पैमाने पर प्रजातियों के लुप्त होने की आखिरी घटना साढ़े छह करोड़ साल पहले घटी थी, जब डायनोसॉर धरती से लुप्त हो गए।

वैज्ञानिकों का कहना है कि इतना बड़ा नुकसान आम तौर पर 10,000 सालों में देखा जाता है। इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर का कहना है कि हर साल कम से कम 50 जानवर खत्म होने के करीब आ जाते हैं।

इसी तरह के निष्कर्ष बीते साल ड्यूक विश्वविद्यालय के एक अध्ययन में भी सामने आए थे। यह ताजा अध्ययन साइंस एडवांसेज जर्नल में छपा है। प्रमुख शोधकर्ता गेरार्डो सेबालोस का कहना है कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो धरती पर जीवन फिर से आने में कई लाख साल लग जाएंगे।

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