हेल्दी लाइफस्टाइल को ऐसे फॉलो करे | how to enjoy healthy lifestyle

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क्या है सेडेंटरी लाइफस्टाइल: सेडेंटरी लाइफस्टाइल यानी ऐसी दिनचर्या जिसमें व्यक्ति काफी लंबे समय तक बैठा रहता है। लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहने की वजह से शरीर में कई तरह की समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं। मुंबई में लोग मल्टिनैशनल कंपनियों में काम करते हुए घंटों एक ही कुर्सी पर बैठ कर दिन निकाल देते हैं। नौकरीपेशा लोगों से लेकर स्कूल कॉलेज जाने वाले बच्चे तक अपने दिन का ज्यादातर समय कंप्यूटर या लैपटॉप के सामने बैठकर काम करते या मोबाइल पर बात करते हुए बिताते हैं। इसके अलावा बेहद छोटे फ्लैटों के चलते घर में होते हुए सामान्य रूप से होने वाले दैनिक कार्यों में भी शारीरिक मेहनत बेहद कम हो गई है। मशीनों के इस जगत में लगातार निष्क्रिय होती जीवनशैली ही सेडेंटरी लाइफस्टाइल कहलाती है।

मेट्रो शहरों में बिगड़ती सेहत
इसी सेडेंटरी लाइफस्टाइल का सबसे बड़ा दुष्परिणाम है शहरों में बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी के बीच बढ़ता मोटापा। केवल मोटापा ही नहीं बल्कि इस खराब जीवनशैली के चलते डायबीटीज, हाइपरटेंशन, अर्थराइटिस जैसी बीमारियां बड़े शहरों की सबसे बड़ी समस्या बन गई हैं। शहरों में बेहद व्यस्त जीवनशैली के चलते एक्सर्साइज जीवन का एक हिस्सा नहीं बन पाती। इसके साथ ही आसानी से उपलब्ध ट्रांसपोर्ट सिस्टम, ऑफिसों में कंप्यूटर पर बैठकर कर काम करना, घरों में शारीरिक गतिविधियों का कम होना आदि लगातार मेट्रो शहरों की सेहत पर खतरा बढ़ा रहा है। दफ्तर में काम के तनाव और इसी तनाव में दिन और रात को एक करते लोग डिप्रेशन, अनिद्रा आदि समस्याओं का भी सामना कर रहे हैं। अपने इसी तनाव से निपटने के लिए तंबाकू, शराब, सिगरेट आदि व्यसनों को अपनाने की प्रवृत्ति भी बढ़ गई है। बच्चों और युवाओं की खान-पान की आदतों में बड़ा भारी बदलाव आया है। पशुओं से मिलने वाली खाद्य सामग्री के बजाए पोटेटो चिप्स जैसे स्टार्च वाले आहार, फैट वाली वस्तुओं की खपत बढ़ गई है। घर से बाहर खाने का चलन आम हो गया, जिससे खुराक में कैलरी और चिकनाई की मात्रा बढ़ना स्वाभाविक है। अक्सर काफी लंबे समय तक दिन-रात कंप्यूटर पर बैठकर काम करना और साथ में फास्ट फूड और बोतलबंद सॉफ्ट ड्रिंक्स को गटकना रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया है। यही कारण है कि पिछले 15 साल में हमारे देश में खासकर 35-50 वर्ष के आयु वर्ग में हृदय धमनी रोगों में जबरदस्त तेजी दिखाई दी है। इस समय शहरी क्षेत्रों में करीब 10 प्रतिशत और गांवों में करीब 6 प्रतिशत आबादी इस रोग के शिकंजे में है।

मोटापा: बीमारियों की जड़- शारीरिक निष्क्रिय जीवन की सबसे बड़ी समस्या है मोटापा। दुनिया में लगभग 1.2 अरब लोग अधिक वजन वाले हैं और उनमें से कम से कम 300 मिलियन लोग मोटापे से ग्रस्त हैं। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के अनुसार, मोटापा उन 10 स्वास्थ्य के जोखिमों में से एक है जिसका निवारण किया जा सकता है। मोटापे के कारण - उच्च रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल का ज्यादा स्तर, लीवर की बीमारी जैसे विकार हो सकते हैं।
- अधिक वजन और मोटापा शरीर में अत्याधिक फैट के जमाव के कारण होता है जिससे स्वास्थ्य बिगड़ सकता है।
  • भारतीय सामान्यतः पेट के मोटापे से ग्रस्त होते हैं। एक सर्वेक्षण के अनुसार, 6.8% शहरी भारतीय मोटे, 33.5% सामान्य से अधिक वजन वाले (ओवरवेट) और 52.6% पेट से मोटे हैं। गांवों में भी 17.1% लोग ओवरवेट हैं।
  • जीवनशैली में बदलाव, शारीरिक गतिविधियों में कमी और अधिक कैलरी युक्त आहार के सेवन में वृद्धि के कारण शहरी क्षेत्रों में मोटापे की अधिक व्यापकता है।
  • बच्चों और किशोरों में मोटापे की व्यापकता 5.6-24 प्रतिशत है।
  • शहर मे 11.7 प्रतिशत किशोरियों को मोटापे से ग्रस्त पाया गया है। पुरुषों (12.54 %) की तुलना में महिलाएं (15.61 %) अधिक ओवरवेट और मोटापे से ग्रस्त हैं।

शरीर में फैट के जमाव के प्रकारः
शरीर में फैट का वितरण अलग-अलग व्यक्तियों में अलग-अलग प्रकार से होता है। सामान्य तौर पर शरीर में फैट का एकत्रीकरण दो प्रकार से होता है- विसरल फैट (पेट के भीतर मौजूद आंतरिक अंगो को घेरने वाला फैट) और सबक्यूटेनियस फैट (त्वचा के ठीक नीचे- शरीर के कुल फैट का लगभग 80 प्रतिशत)।

क्या है मेटाबॉलिज़म?
मेटाबॉलिज़म हमारे शरीर की एक ऐसी प्रकिया है जो भोजन को एनर्जी, एंजाइम या फैट में परिवर्तित कर देती है। सरल शब्दों में कहें तो यह हमारे शरीर का एनर्जी प्रोवाइडर होता है और शरीर के सेल्स को बनने में मदद करता है। मेटाबॉलिज़म की प्रक्रिया हमारे शरीर में 24 घंटे चलती रहती है। यदि यह प्रकिया रुक जाए तो शरीर की तमाम क्रियाएं भी ठहर सकती हैं। मेटाबॉलिज़म आमतौर पर दो प्रकार का होता है- 'हाई मेटाबॉलिज़म' और 'स्लो मेटाबॉलिज़म'। मेटाबॉलिज़म के दोनों प्रकार हमारी सेहत को प्रभावित करते हैं। इसलिए इसका संतुलित होना जरूरी है। मेटाबॉलिज़म का घटना सेडेंटरी लाइफस्टाइल का एक अहम दुष्परिणाम है। मेटाबॉलिज़म काफी हद तक हमारे खानपान और शारीरिक गतिविधियों पर निर्भर करता है। गलत खानपान या फिर लंबे समय तक कुछ भी न खाने से इसकी समस्या हो सकती है। खाने की सभी खराब आदतें जैसे असमय खाना, खाने से जी चुराना आदि आपके मेटाबॉलिज़म को गड़बड़ कर सकता है।

सेडेंटरी लाइफस्टाल के प्रभाव
1- सामान्य स्वास्थ्य समस्याएं- सुस्त और लंबे समय तक एक जगह बैठी रहने वाली दिनचर्या का सबसे बड़ा नुकसान है मोटापा। मोटापा यानी अपने आप में हजारों बीमारियों की जड़। डायबीटीज से लेकर, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय से जुड़े रोग, शरीर के जोड़ों से जुड़ी समस्या आदि शामिल है।
2- लचीलेपन की कमी- इससे शरीर में रक्त का संचार उतनी आसानी से नहीं हो पाता। इसके साथ ही शरीर के जिस भी हिस्से में लचीलेपन की कमी आती है वहां दर्द की समस्या बन जाती है। जितना ज्यादा आप बैठते हैं उतनी ही आपके कूल्हे और कमर की हड्डी में समस्याएं होने लगती हैं।
3- मेटाबॉलिज़म का कम होना- शरीर में मेटाबॉलिज़म की प्रक्रिया धीमी होने से शरीर में खाया जाने वाला फैट पचता नहीं है और जमा होने लगता है। ठंड या गर्मी ज्यादा लगने लगती है और ब्लड प्रेशर भी कम हो सकता है।
4- ऑस्टियोपोरोसिस- शरीर की नसें मुड़ने के लिए बनी हैं और हमारी हड्डियां भार सहने के लिए। लेकिन लगातार एक जगह पर बैठे रहने से यह बीमारी हो जाती है।

यह भुगतना पड़ सकता है आपको-
1- शारीरिक निष्क्रियता शरीर में कई तरह के कैंसर का जोखिम बढ़ा देता है।
2- इससे व्यक्ति में डिप्रेशन, चिंता, जड़बुद्धिता जैसी समस्या पैदा हो जाती है।
3- लगातार शरीरिक निष्क्रियता से कुछ विशेष प्रकार के हृदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है।
4- अधिक शारीरिक कसरत करने वाले लोगों में कोर्नरी हार्ट डिजीज होने का खतरा कम हो जाता है।
5- शारीरिक निष्क्रियता मोटापे का प्रमुख कारण है और इससे कई बीमारियां जुड़ी हैं।
6- इससे हाई ब्लड प्रेशर और शरीर में कलेस्टरॉल लेवल बढ़ने का भी खतरा रहता है।

अपनाएं यह छोटी-छोटी आदतें-
1- जहां तक हो लिफ्ट के बजाए सीढ़ियों का इस्तेमाल करें।
2- लगातार बैठकर लंबे समय तक काम न करें।
3- अपनी गाड़ी पास पार्क करने के बजाए दूर पार्क करें।
4- मोबाइल फोन पर बात करते समय घूमते हुए बात करें।
5- अपनी दिनचर्या में व्यायाम को जरूर शामिल करें।

एक्सर्साइज बचा सकती है खतरों से
रेगुलर एक्सर्साइज से सिर्फ आप फिट ही नहीं होते बल्कि बहुत से लाभ है जो रेग्युलर एक्सर्साइज करने से होते हैं। एक्सर्साइज करने से न सिर्फ तन फ्रेश होता है, बल्कि हमारी पूरी बॉडी को आवश्यक एनर्जी मिलती है और साथ ही ब्लड सर्कुलेशन भी तेज होता है। इससे त्वचा में निखार आता है जिससे हमारी बॉडी के हेल्थ और ब्यूटी पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है।
- नियमित व्यायाम करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता में बढ़ोतरी होती है।
- हृदय रोग एवं डायबीटीज जैसे रोगों का खतरा कम हो जाता है।
- शरीर को नुकसान पहुंचाने वाली अनावश्यक चर्बी कम हो जाती है।
- नियमित व्यायाम शुक्राणुओं के क्वॉलिटी को बेहतर कर प्रजनन क्षमता को बढ़ाता है।
- व्यायाम मानसिक स्वास्थ्य को ठीक रखता है।
- बॉडी का मेटाबॉलिज़म संतुलित और नियंत्रित रहता है।
- नाश्ते से पहले किया गया व्यायाम वजन कम करने में मददगार होता है।
- नियमित व्यायाम सांस से संबंधित तकलीफों को दूर करने में भी मददगार होता है।
- व्यायाम मांसपेशियों को सुडौल बनाता है और झुर्रियों को कम करता है।
- कमर दर्द के रोगियों के लिए नियमित रूप से विशेष व्यायाम फायदेमंद है।

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