बच्चों की तस्करी करने वाले NGO का राजफाश

दिल्ली में स्वयंसेवी संस्था (एनजीओ) की आड़ में मासूम बच्चों की तस्करी करने वाले बड़े गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है. पुलिस ने गिरोह में शामिल तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है. इनमें एक महिला भी शामिल है.

आशंका है कि इस गिरोह के तार न सिर्फ दिल्ली, बल्कि कई राज्यों से जुड़े हैं. शुरुआती जांच में पता चला कि यह गिरोह करीब 20 बच्चों की तस्करी कर चुका है. आरोपी को द्वारका नॉर्थ थाना पुलिस ने आठ जून को गिरफ्तार कर लिया था. जिला दक्षिणी पश्चिमी पुलिस उपायुक्त आरए संजीव ने बताया कि महिला एवं बाल विकास निदेशालय से पुलिस को इस बात की सूचना मिली कि द्वारका क्षेत्र में एक एनजीओ बच्चों की तस्करी में लिप्त है. संस्था के क्रियाकलाप को संदिग्ध पाता देख पुलिस ने एक टीम का गठन किया.

पुलिस ने एनजीओ के पास एक दंपति को नकली ग्राहक बनाकर भेजा. इस दंपति ने संस्था के पदाधिकारियों से बात करने के बाद एक बच्चे का सौदा चार लाख 20 हजार में तय किया. सौदा तय होने के बाद दंपती को रजिस्ट्रेशन कराने के लिए कहा गया. इसके एवज में इन्हें आठ हजार रुपये देने को कहा गया. इस एनजीओ के कार्यालय का संचालन करने वाले विनोद कुमार ने इन्हें बच्चे के गोद लेने से जुड़े कागजात देने ओर बच्चे के जन्म प्रमाण पत्र देने की बात कही.

इसके बाद आठ जून को दंपति को सूचना मिली कि एनजीओ के पास फिलहाल दो बच्चे उपलब्ध हैं. इनमें से एक नवजात शिशु है और दूसरा करीब दो साल का बच्चा है. दोनों में किसी एक बच्चे को वे साढ़े पांच लाख रुपये देकर ले जा सकते हैं. दंपति से मिली सूचना के बाद पुलिस टीम ने संस्था के कार्यालय पर छापेमारी की. चार लोगों की टीम अंदर भेजी गई. अंदर गई टीम को जैसे ही दंपति की ओर से सूचना मिली टीम ने वहां एक दो वर्ष के बच्चे के साथ विनोद कुमार, शिखा चौधरी व अनिल पांडेय नामक शख्स को धर दबोचा.

छानबीन के दौरान पुलिस को पता चला कि एनजीओ की आड़ में बच्चों की तस्करी करने वाला यह गिरोह तीन तरीकों से बच्चों को हासिल करता था. गिरोह बच्चों को चुराकर, अपहरण और आइवीएफ तकनीक के इस्तेमाल से बच्चों को हासिल करता था. गिरोह बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र या गोद लेने से जुड़े कागजात भी लोगों को मुहैया कराता था.

पूछताछ में पुलिस को पता चला कि जिस दो वर्षीय बच्चे को पुलिस ने बरामद किया है वह बच्चा लोनी इलाके से चुराया गया है. बच्चा अपने माता-पिता का नाम तो बता रहा है, लेकिन अपने घर का पता नहीं बता पा रहा है. पुलिस के मुताबिक फिलहाल बच्चे को बाल आश्रय गृह भेज दिया गया है. मामले की छानबीन जारी है. इस मामले में गिरफ्तार शख्स विनोद कुमार गोयला डेयरी में रहता है. विनोद का पहले द्वारका में प्रॉपर्टी का कारोबार था, लेकिन घाटा होने के कारण उसने पैसा कमाने के लिए यह रास्ता चुना.

Crime news , Delhi NGO case ,Trafficking of children

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