स्कूल से भागा लड़का बना 2 कंपनियों का मालिक

नई दिल्ली। उसे स्कूल अच्छा नहीं लगता था। वो स्कूल में अंकर्फेटेबल फील करता था और 10वीं तक भी पढ़ाई नहीं कर पाया। 9वीं में 2 बार फेल हुआ, लेकिन लाइफ में हमेशा टॉपर आया। उसकी उम्र मात्र 16 साल है और वो 2 कंपनियों का मालिक है। सच में यह किसी चमत्कार जैसा ही जान पड़ता है। लेकिन, यह भी सच है कि चमत्कार भी मेहनतश या लीक से हटकर जोखिम उठाने वालों के साथ ही होते हैं और ऐसे ही एक शख्स हैं- अंगद दरयानी।

अंगद ने स्कूल जाना इसलिए छोड़ दिया, क्योंकि उन्हें जीवन की पाठशाला से सीखने में ज्यादा मजा आता है। अंगद ने फेसबुक पोस्ट में लिखा, 'मैं जब 9वीं कक्षा में था, तो मैंने स्कूल छोड़ दिया, क्योंकि मैं बार-बार पुराने कॉन्सेप्ट्स को बिल्कुल सीखना नहीं चाहता था।' उन्होंने कहा कि स्कूली शिक्षा में बच्चे नए आइडियाज नहीं लाते और किताबों से थिअरीज याद करते हैं.... सिर्फ बाद में भूल जाने के लिए।

अंगद ग्रेडिंग सिस्टम में बिल्कुल भरोसा नहीं रखते। इसकी जगह वह घर पर पढ़ाई करने को बेहतर मानते हैं और ऐसा संभव इसलिए हो पाया, क्योंकि उनके पैरंट्स उन्हें समझ सके। फेसबुक पोस्ट में अंगद ने कहा, 'जब मैं 10 साल का था, तो मैं अपने पिता के पास गया और कहा कि मैं हॉवर क्राफ्ट बनाना चाहता हूं और मेरे आइडिया का मजाक उड़ाने की जगह पिता जी ने मुझे आगे बढ़ने को कहा।'

अंगद जब बहुत छोटे थे, तभी से उनके पास नई चीजें बनाने की प्रतिभा है। तभी टीवी शोज, मेक मैग्जिन के ट्यूटोरिअल्स या अपने पिता के ऑफिस के इंजिनियरों से सीखकर वह कुछ ना कुछ नया बना लिया करते। अब 16 साल की उम्र में अंगद दो कंपनियां चला रहे हैं, जो उत्सुकता और नवाचार (क्यूरिअसिटी ऐंड इनोवेशन) को बढ़ावा देने वाले प्रॉडक्ट तैयार करती हैं। एमआईटी के प्रफेसर डॉ. रमेश रस्कर के साथ काम करते हुए अंगद और उनकी टीम ने वर्चुअल ब्रैलर भी बनाया, जो किसी भी पीडीएफ डॉक्युमेंट को ब्रैल में कन्वर्ट कर देता है।

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