अब घर घर में दिखाई जाएंगी एडल्ट फिल्में

नयी दिल्ली। फिल्मों को रिलीज होने से पहले सार्टिफिकेट देकर उसकी कैटगिरी निराधारित करने वाली संस्था सवालों के घेरे में आ गई हैं। ताजा खुलासा के मुताबिक सेंसर बोर्ड ने मापदंडों को ताक पर रखकर 172 फिल्मों को ए सार्टिफिकेट के बजाए यूए सार्टिफिकेट दे दिया।

सीबीएफसी को फिल्म सर्टिफिकेट्स देने में पक्षपात और अन्य गड़बड़ियों के लिए नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की इस रिपोर्ट के बाद जमकर आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। इस रिपोर्ट के मुताबिक सेंसर बोर्ड ने मानदंडों का उल्लंघन कर 172 'ए' कैटेगरी की फिल्मों को 'यूए' कैटेगरी का फिल्म सर्टिफिकेट और 166 'UA' कैटेगरी की फिल्मों को 'U' कैटेगरी का सर्टिफिकेट दे दिया।

सीएजी ने 1 अक्टूबर 2013 से 31 मार्च 2015 के बीच के इन फिल्मों पर ये अहम रिपोर्ट तैयार की है। आरटीआई के जरिए इस बात का खुलासा हुआ है। आरटीआई कार्यकर्ता विहार दूरवे की तरफ से फाइल की गई एक आरटीआई के जबाब में सीएजी ने ये अहम जानकारी दी है।

सीएजी के मुताबिक 'पिछले लगातार 6 साल और 12 सालों में चूक होने के बाद भी सर्टिफिकेशन फीस और उपकर में कोई कमी-बढ़ौती नहीं की गई। आपको बता दें कि ये कोई पहला मामला नहीं है जब सेंसर बोर्ड सवालों के घेरे में आया हो। इससे पहले सेंशर बोर्ड के पूर्व सीईओ राकेश कुमार को सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। उन्हें एक फिल्म को क्लीयर करने के लिए 70,000 रुपए रिश्वत मांगने के लिए गिरफ्तार किया गया था।

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